देख कर बरसते बादलों को वो बच्चों की तरह इठलाना तेरा!
नँगे पाँव जी भर मचलना, जा के छत पे भीग जाना तेरा!
सर्द हवाओं की शरारतों से डर कर खुद में सिमट जाना तेरा !
याद रहेगा हर एक पल हसीं,ये वक्त तेरा ये, ज़माना तेरा।
-दीपक भरद्वाज
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