Friday, 15 February 2019

आक्रोश

माँ भारती के अमर सपूतो एक प्रण तुम इस बार करो!
दुष्ट शत्रु के सुर्ख लहू से दुर्गा चंडी का श्रृंगार करो!

त्रिशूल ब्रह्मोस अग्नि पृथ्वी को खड़ा एक कतार करो!
एक एक कर के दागो सबको, शत्रु पर बज्र प्रहार करो!

हिरण्यकश्यप का वध करने को फिर से नरसिंह अवतार धरो!
कालभैरव से विकराल वनों कोई विनय ना तुम स्वीकार करो!

माँ भारती का चीर हरण हुआ है,खून में तुम उबाल भरो!
शत्रु की छाती पर पांव धरो और चीर के टुकड़े चार करो!

इंक़लाब का नारा पुकारो,और तांडव की हुंकार भरो!
शत्रुचिता की भस्म रमाने को,शिवरात्रि का इंतज़ार करो!

माँ भारती के अमर सपूतो एक प्रण तुम इस बार करो !
दुष्ट शत्रु के सुर्ख लहू से दुर्गा चंडी का श्रृंगार करो।

Thursday, 14 February 2019

इतनी नफरत क्यों

बारूद से जलते जिस्म के हिस्से पानी से भिगो रहा है!
सड़कों पर बिखरे खून के धब्बे आंसुओं से धो रहा है!
ये बादल यूँ हीं बेवजह नहीं बरस रहे, ज़रा गौर करना!
उन महान शहीदों के बलिदान पर वो खुदा भी रो रहा है।

Monday, 11 February 2019

नाराज़गी

बांधे थे जो मजार के पीपल से वफ़ा के धागे, आज वो खोल आया हूं मैं!
बैठा है जो पत्थर बन कर उसके नीचे ,चार बातें उसे भी बोल आया हूं मैं!
अपनी खुदाई की तो फ़िक्र करता है, मेरी तन्हाई की नहीं!
इन्साफ के तराजु में आज उसे भी तोल आया हूं मैं।

Thursday, 7 February 2019

बारिश और तुम

देख कर बरसते बादलों को वो बच्चों की तरह इठलाना तेरा!
नँगे पाँव जी भर मचलना, जा के छत पे भीग जाना तेरा!
सर्द हवाओं की शरारतों से डर कर खुद में सिमट जाना तेरा !
याद रहेगा हर एक पल हसीं,ये वक्त तेरा ये, ज़माना तेरा।
                     -दीपक भरद्वाज

Tuesday, 5 February 2019

दरख्वास्त

गर है तुझे इश्क़ मुझसे तो इज़हार करदे!
वरना उठा ख़ंजर और सीने के पार करदे!
फरिश्ता बना बैठा हूँ, दिल में प्यार भर के!
कतरा कतरा बह निकले, दिल पे वार करदे।
यूँ भी तो दुनिया में बेवफाई का मौसम है!
तूं भी अपने बेवफा होने का इकरार कर दे!
कर डाल हज़ार टुकड़े मेरे मासूम दिल के!
तूं मेरा इस दुनिया में आना यादगार करदे।
वो ज़माने कुछ और थे जब मंसूर सूली चढ़ा!
तू सज़ा देने का तरीका नया इख़्तियार कर दे!
मेरा सबसे अपना हो कर नज़रंदाज़ कर मुझे!
मुझे आंसू बहाने की हद तक बेकरार करदे।
गर है तुझे इश्क़ मुझसे तो इज़हार करदे!
वरना उठा ख़ंजर और सीने के पार करदे!
फरिश्ता बना बैठा हूँ, दिल में प्यार भर के!
कतरा कतरा बह निकले, दिल पे वार करदे।
                   -दीपक भारद्वाज